जयपुर। राजस्थान के सरकारी कर्मचारियों की लंबित मांगों और राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) में संभावित बदलावों को लेकर 'अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत)' ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजधानी जयपुर के गवर्नमेंट प्रेस कार्यालय में आयोजित एक आपातकालीन राज्य स्तरीय महाबैठक में कर्मचारी नेताओं ने सरकार की नीतियों के प्रति गहरा आक्रोश जताया। संगठन ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए आर-पार की लड़ाई का शंखनाद करते हुए चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने की रूपरेखा तैयार की है।

आरजीएचएस को बीमा कंपनी के हाथों में सौंपने का विरोध

महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बैठक के एजेंडे को स्पष्ट करते हुए कहा कि कर्मचारियों के हितों से जुड़े 25 सूत्री मांगपत्र पर गहन मंथन किया गया है। कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि आरजीएचएस ($RGHS$) को किसी भी निजी या सरकारी बीमा कंपनी के सुपुर्द न किया जाए। इसके साथ ही पहले की तरह ही पैनल में शामिल अस्पतालों में ओपीडी-आईपीडी ($OPD-IPD$) इलाज व दवाइयां सुचारू रूप से मिलती रहें, समर्पित अवकाश (सरेंडर लीव) का नकद भुगतान फिर चालू हो और संविदा व ठेका प्रथा पर काम कर रहे कर्मियों को स्थाई किया जाए।

चिकित्सा मंत्री के बयान से भड़का गुस्सा, अनदेखी का आरोप

बैठक के दौरान हाल ही में चिकित्सा मंत्री द्वारा दिए गए उस बयान की कड़ी निंदा की गई, जिसमें उन्होंने आरजीएचएस को बीमा कंपनी के जरिए चलाने का संकेत दिया था। कर्मचारी प्रतिनिधियों का तर्क है कि ऐसा होने से सेवारत कर्मचारियों और बुजुर्ग पेंशनर्स को मिलने वाली कैशलेस इलाज की सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित होंगी। महासंघ ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर कर्मचारियों की जायज और न्यायोचित मांगों को ठंडे बस्ते में डाल रही है।

मुख्य सचिव को चेतावनी और जिला स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी

सरकार पर दबाव बनाने के लिए महासंघ ने अपने आंदोलन के पहले चरण की घोषणा कर दी है। तय रणनीति के मुताबिक, 19 मई को प्रदेश अध्यक्ष की अगुवाई में मुख्यमंत्री के नाम मुख्य सचिव को एक आखिरी चेतावनी पत्र (ज्ञापन) सौंपा जाएगा। इसके तुरंत बाद, 20 मई से राज्य के सभी जिलों में जिला अध्यक्षों के नेतृत्व में कलेक्टर्स, विभागाध्यक्षों और स्थानीय कार्यालय प्रमुखों के माध्यम से मुख्यमंत्री तक विरोध संदेश भेजे जाएंगे।

25 मई से ठप रहेगा काम, नहीं सुधरे हालात तो निकलेगी 'जागृति यात्रा'

यदि इस चेतावनी के बाद भी प्रशासन ने मांगों पर कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो 25 मई से लेकर 30 मई तक पूरे राजस्थान में सामूहिक कार्य बहिष्कार किया जाएगा। इस दौरान कर्मचारी रोजाना दोपहर 12:30 बजे से 1:30 बजे तक एक घंटे के लिए कामकाज पूरी तरह ठप रखेंगे। महासंघ ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि इसके बावजूद भी अगर मसले का हल नहीं निकला, तो पूरे प्रदेश में व्यापक "कर्मचारी जागृति यात्रा" निकालकर आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा। इस महाबैठक में राजस्थान के कोने-कोने से आए सैकड़ों कर्मचारी नेताओं ने हिस्सा लिया और एकजुटता का संकल्प लिया।