सियासी संकट गहराया: एक के बाद एक दलों में सेंध की खबरें
मुंबई। महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर भारी हलचल देखने को मिल रही है, जहाँ उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) के लोकसभा सांसदों के पाला बदलने की अटकलों का बाजार बेहद गर्म है। हाल ही में उद्धव गुट के एक सांसद की, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के एक केंद्रीय मंत्री से दिल्ली में हुई मुलाकात ने इस सियासी सस्पेंस को और गहरा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि उद्धव सेना के 9 में से 6 से 7 सांसद बागी रुख अपनाकर पाला बदल सकते हैं।
इस बीच, जब उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित अपने निवास 'मातोश्री' में सांसदों की एक आपात बैठक बुलाई, तो 9 में से केवल 4 सांसद ही भौतिक रूप से वहाँ पहुँचे, जबकि शेष 5 सांसदों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल) के जरिए हिस्सा लिया।
दिल्ली में हुई गुप्त बैठक और 'ऑपरेशन टायगर'
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, यवतमाल-वाशिम से उद्धव गुट के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव के सरकारी आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब शिंदे गुट द्वारा 'ऑपरेशन टायगर' के जरिए उद्धव खेमे में बड़ी सेंधमारी करने की खबरें उड़ रही हैं। हालांकि, सांसद संजय देशमुख ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के एक कॉलेज की प्रशासनिक अनुमति के सिलसिले में मंत्री से मिलने गए थे और उनके बीच कोई राजनीतिक खिचड़ी नहीं पक रही है। खुद केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी इसे एक सामान्य शिष्टाचार भेंट बताते हुए कहा कि दोनों पुराने मित्र हैं और पड़ोसी निर्वाचन क्षेत्र के नाते मिलते रहते हैं।
क्या कहता है दल-बदल विरोधी कानून का गणित?
महाराष्ट्र की इस सियासी उठापटक के बीच तकनीकी और कानूनी समीकरण भी चर्चा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। भारतीय संविधान के दल-बदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत, किसी भी दल के सांसदों या विधायकों को अपनी सदस्यता सुरक्षित रखने और अयोग्य घोषित होने से बचने के लिए मूल पार्टी के कम से कम दो-तिहाई (2/3) सदस्यों को एक साथ तोड़ना अनिवार्य होता है।
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सीटों का गणित: वर्तमान में लोकसभा के भीतर उद्धव ठाकरे की पार्टी के पास कुल 9 सांसद हैं।
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कानूनी आवश्यकता: यदि बागी धड़ा अपनी सांसदी बचाए रखकर किसी अन्य दल (जैसे शिंदे गुट) में विलय करना चाहता है, तो उन्हें कम से कम 6 सांसदों का एक साथ पार्टी छोड़ना अनिवार्य होगा। यही वजह है कि 6 से 7 सांसदों के टूटने का गणित लगातार हवा में तैर रहा है।
'ऑपरेशन वोल्फ' की चेतावनी और 19 जून की परीक्षा
पार्टी में बड़ी बगावत की इन खबरों को शिवसेना (UBT) के मुख्य प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने सिरे से खारिज करते हुए कोरी अफवाह बताया है। राउत ने पलटवार करते हुए कहा कि विरोधियों के इस भ्रम जाल को तोड़ने के लिए उनकी पार्टी अब 'ऑपरेशन वोल्फ' (Operation Wolf) शुरू करेगी। उन्होंने दावा किया कि जो सांसद मातोश्री नहीं आ सके थे, वे पारिवारिक कारणों (जैसे बेटी की शादी व बीमारी) के चलते वर्चुअली जुड़े थे और सभी सांसद पूरी ताकत से उद्धव ठाकरे के साथ खड़े हैं।
अब देश के सभी राजनीतिक पंडितों की निगाहें आगामी 19 जून पर टिकी हैं, जब अविभाजित शिवसेना का पारंपरिक 'स्थापना दिवस' कार्यक्रम आयोजित होने जा रहा है। संजय राउत के मुताबिक, इस गौरवशाली दिन पर सभी सांसद एक साथ मंच पर उपस्थित होकर पार्टी की अटूट एकता का संदेश देंगे और विरोधियों के दावों की हवा निकाल देंगे।

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