एलओसी पर चीन के निकट न्योमा एयरबेस अब पूरी तरह से ऑपरेशनल
नई दिल्ली। भारत ने एलओसी पर चीन के निकट न्योमा एयरबेस को अब पूरी तरह से ऑपरेशनल कर दिया गया है। वायुसेना का ये फाइटर बेस सीमा रेखा से महज 30 किलोमीटर दूर है। इसके उद्घाटन के लिए वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह खुद सी-130जे एयरक्राफ्ट उड़ाकर इस एयरबेस पर पहुंचे।
वायुसेना का नया फाइटर बेस लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल से महज 30 किलोमीटर के आसपास है। इसके ऑपरेशनल होने से ज़रूरत पड़ने पर सैनिकों की तेज आवाजाही और तैनाती हो सकेगी। पहले यहां से कभी कभी हेलीकॉप्टर और वायुसेना के परिवहन विमान उड़ान भरते थे, लेकिन अब यहां से लड़ाकू विमानों के संचालन और रखरखाव की सारी सुविधाएं मौजूद हैं। आने वाले दिनों में यहां वायुसेना के अग्रिम श्रेणी के राफाल, सुखोई और तेजस जैसे फाइटर एयरक्राफ्ट उड़ान भरते हुए दिखाई देंगे।
शुरुआत में न्योमा का इस्तेमाल एडवांस्ड लैडिंग ग्राउंड के तौर पर किया गया था। खासकर 2020 में चीन के साथ तनातनी के दौरान जवानों की तैनाती और सैनिकों के साजो-सामान लाने ले जाने के लिये ट्रांसपोर्ट एयरकाफ्ट और चिनूक हेलीकॉप्टर ने यहीं से उड़ान भरी थी। उसी दौरान इस एयरफील्ड की उपयोगिता को देखते हुए लड़ाकू विमानों की उड़ान के लिये इसको पूर्ण रूप से ऑपरेशनल करने का फैसला लिया गया।
13,700 फीट की ऊंचाई पर बने इस बेस की लागत 218 करोड़ रुपए आई है। यहां करीब तीन किलोमीटर का रनवे है। माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे ऊंचे एयरबेस में से एक है।

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