जोधपुर। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान बेनीवाल को राजस्थान उच्च न्यायालय से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। अदालत ने नागौर जिले के पादू कलां पुलिस थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में सांसद के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक या दमनकारी कार्रवाई करने पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय के इस अंतरिम फैसले से सांसद को पुलिसिया कार्रवाई से फौरी तौर पर एक बड़ा सुरक्षा कवच मिल गया है।

सांसद हनुमान बेनीवाल की याचिका पर उच्च न्यायालय का बड़ा अंतरिम आदेश

माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश फरजंद अली की एकलपीठ ने सांसद बेनीवाल द्वारा दायर की गई आपराधिक विविध याचिका पर यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। याचिका में नागौर पुलिस द्वारा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम के तहत दर्ज की गई प्राथमिकी को कानूनन चुनौती दी गई थी। अदालत ने प्रारंभिक दलीलों को सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन सप्ताह बाद का समय निर्धारित किया है, तब तक के लिए सांसद को इस मामले में पूरी राहत प्रदान की गई है।

सिर्फ राजनीतिक आयोजन का हिस्सा बनना व्यक्तिगत अपराध नहीं

मामले की सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय ने प्रथम दृष्टया यह माना कि इस प्रकरण में कई ऐसे गंभीर कानूनी बिंदु शामिल हैं, जिनका विस्तृत न्यायिक परीक्षण किया जाना आवश्यक है। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मात्र किसी राजनीतिक जनसभा या जुलूस में हिस्सा लेने से ही किसी जनप्रतिनिधि या व्यक्ति की व्यक्तिगत आपराधिक संलिप्तता साबित नहीं हो जाती। न्यायाधीश ने टिप्पणी की कि यह गहराई से देखना होगा कि क्या प्राथमिकी में याचिकाकर्ता के खिलाफ ऐसे कोई विशिष्ट साक्ष्य मौजूद हैं जो उनके व्यक्तिगत आपराधिक दायित्व को तय करते हों।

रेत माफिया के खिलाफ रैली और जुलूस से जुड़ा है पूरा घटनाक्रम

यह पूरा कानूनी विवाद नागौर के पादू कलां थाने में इस वर्ष मई महीने में दर्ज हुए एक मुकदमे से संबंधित है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, यह मामला जनवरी माह में रियान बड़ी क्षेत्र में अवैध रेत खनन और माफियाओं के विरोध में आयोजित एक विशाल राजनीतिक सभा तथा उसके बाद निकाले गए विरोध मार्च के बाद दर्ज किया गया था। इस मामले में पुलिस प्रशासन ने सरकारी आदेशों की अवहेलना और मार्ग अवरुद्ध करने के आरोपों में सांसद हनुमान बेनीवाल सहित करीब तेरह अन्य स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं को नामजद आरोपी बनाया है।

उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में मांगा जवाब

न्यायालय की कार्यवाही के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस संबंध में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के लिए अदालत से समय की मांग की। उच्च न्यायालय ने सरकारी पक्ष की मांग को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी, लेकिन साथ ही यह स्पष्ट कर दिया कि अगली सुनवाई तक बेनीवाल के खिलाफ कोई सख्त कदम नहीं उठाया जाएगा। अब तीन सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में सरकार के जवाब के आधार पर ही इस मामले की आगे की दिशा तय होगी।