कोटा: राजस्थान के कोटा शहर के बोरखेड़ा क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक बेहद हैरान और डरा देने वाला वाकया सामने आया, जब कोरल पार्क स्थित एक बॉयज हॉस्टल परिसर में अचानक एक विशालकाय मगरमच्छ घुस आया। दोपहर करीब एक बजे हॉस्टल के बेसमेंट में स्थित मेस (रसोईघर) में मगरमच्छ को रेंगते हुए देखकर वहां खाना बना रहे रसोइये और अन्य कर्मचारी बुरी तरह डर गए और अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बाहर की तरफ भागे। इस घटना की भनक लगते ही हॉस्टल में रह रहे कोचिंग छात्रों और प्रबंधन स्टाफ के बीच हड़कंप मच गया और पूरे परिसर में दहशत का माहौल बन गया।

रसोईघर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई एंट्री

हॉस्टल के भीतर मगरमच्छ के दाखिल होने की यह पूरी घटना वहां सुरक्षा के लिहाज से रसोईघर में लगाए गए सीसीटीवी कैमरे में लाइव कैद हो गई। डिजिटल फुटेज में साफ तौर पर देखा जा सकता है कि लगभग चार फीट लंबा यह जलीय जीव मुख्य सीढ़ियों से उतरते हुए बेहद सहजता के साथ धीरे-धीरे मेस के अंदरूनी हिस्से तक पहुंच गया। मगरमच्छ को इस तरह अचानक अपने बेहद करीब पाकर वहां मौजूद कर्मचारियों के होश उड़ गए, जिसके बाद हॉस्टल के कमरों में रह रहे छात्रों को भी इसकी जानकारी दी गई और एहतियात के तौर पर मेस वाले हिस्से को खाली करा दिया गया।

छात्रों के प्रयास से और आक्रामक हुआ मगरमच्छ

हॉस्टल में वन्यजीव की मौजूदगी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में कोचिंग छात्र कौतूहल और डर के मारे मौके पर जमा हो गए। इस दौरान कुछ अति-उत्साही छात्रों ने खुद के स्तर पर ही लाठी-डंडों की मदद से मगरमच्छ को काबू करने और उसे पकड़ने का प्रयास शुरू कर दिया। हालांकि, इंसानी दखल और शोर-शराबे के कारण मगरमच्छ और ज्यादा घबरा गया तथा खुद को बचाने के लिए मेस के भीतर इधर-उधर तेजी से भागने लगा। वन्यजीव के इस आक्रामक और रक्षात्मक रुख के कारण काफी देर तक हॉस्टल परिसर में भारी अफरा-तफरी और तनाव की स्थिति बनी रही।

नजदीकी बरसाती नाले से हॉस्टल पहुंचने की आशंका

स्थानीय नागरिकों और हॉस्टल प्रशासन के मुताबिक, कोरल पार्क के इस हॉस्टल के ठीक पास से क्षेत्र का एक बड़ा बरसाती नाला गुजरता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का अनुमान है कि मानसूनी हलचल या पानी की तलाश में यह मगरमच्छ उसी नाले से बाहर निकल आया होगा और रास्ता भटककर हॉस्टल की खुली बाउंड्री से होता हुआ बेसमेंट में घुस गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हॉस्टल संचालकों ने बिना कोई जोखिम उठाए तुरंत स्थानीय पुलिस और वन विभाग के नियंत्रण कक्ष को पूरे मामले की लिखित और दूरभाष पर सूचना दी।

वन विभाग की टीम का रेस्क्यू ऑपरेशन और चंबल में विदाई

आपातकालीन सूचना मिलते ही वन विभाग की एक विशेष रेस्क्यू टीम आवश्यक साजो-सामान और जाल के साथ तुरंत मौके पर पहुंच गई। रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे वनकर्मी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी टीम ने हॉस्टल के मेस में करीब आधे घंटे तक चली कड़ी मशक्कत और तकनीकी सूझबूझ के बाद मगरमच्छ को बिना किसी चोट के सुरक्षित रूप से काबू (रेस्क्यू) कर लिया। वन विभाग की टीम ने बाद में पकड़े गए मगरमच्छ को उसके प्राकृतिक आवास यानी चंबल नदी के गहरे पानी में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया, जिसके बाद हॉस्टल के छात्रों, कर्मचारियों और परिजनों ने राहत की सांस ली।