सावन में शिव पूजा के लिए सही बेलपत्र का उपयोग करें
सावन का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है क्योंकि यह महादेव को प्रिय है! जब भगवान भोलेनाथ की पूजा करते हैं तो उसमें बेलपत्र जरूर अर्पित करते हैं। बेलपत्र के बिना शिव जी की पूजा अधूरी मानी जाती है। कुछ लोग पूजा में शिवलिंग पर कटे, टूटे या फटे हुए बेलपत्र चढ़ा देते हैं। कई बार अच्छे बेलपत्र न होने की वजह से या फिर अज्ञानतावश लोग ऐसी गलती कर देते हैं। ऐसे में प्रश्न यह है कि शिव पूजा के लिए सही बेलपत्र की पहचान कैसे करें? बेलपत्र तोड़ने के नियम क्या हैं?
पूजा के लिए सही बेलपत्र की पहचान कैसे करें?
बेलपत्र यानि बेल के पेड़ की पत्तियां। बेलपत्र में तीन पत्तियां होती हैं। पूजा के लिए आपको तीन पत्तियों वाला ही बेलपत्र लेना चाहिए।
जिस बेलपत्र में तीन पत्तियां न हों, उसे पूजा में न शामिल करें।
बेलपत्र हरे होने चाहिए। पीले या चितकबरे रंग या फिर धब्बेदार बेलपत्र को पूजा के लिए नहीं लेना चाहिए।
बेलपत्र की पत्तियां कटी, फटी या टूटी हुई नहीं होनी चाहिए, न ही वो मुरझाया हो।
कुछ बेलपत्र में एक पत्ता काफी बड़ा और बाकी दो बेडौल होते हैं, उनको भी नहीं लेना चाहिए।
वहीं यदि आपके पास पूजा के लिए बेलपत्र नहीं हैं तो आप शिवलिंग पर अर्पित किए गए बेलपत्र को उठाकर पानी से साफ कर लें। फिर उसे शिवजी को चढ़ा सकते हैं.
बेलपत्र तोड़ने के नियम
किसी भी महीने की अष्टमी, नवमी, त्रयोदशी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथि को बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। जब कोई तिथि समाप्त हो रही हो और नई तिथि शुरू हो रही हो तो उस समय में बेलपत्र नहीं तोड़ना चाहिए। सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ना वर्जित है।
बेलपत्र का महत्व
शिव पुराण के अनुसार, जो लोग सावन माह में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करते हैं, उनको एक करोड़ कन्यादान के समान पुण्य फल मिलता है।

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