कोटा मंडल में विदेशी तकनीक वाली 'वंदे भारत' का ट्रायल शुरू, 180 किमी/घंटा की रफ्तार पर होगी टेस्टिंग

पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा-नागदा रेल खंड पर वंदे भारत ट्रेनसेट (चेयर कार) के नए रैक का परीक्षण (ट्रायल) एक बार फिर शुरू हो गया है। इस बार की ट्रेन विशेष है क्योंकि इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों और विदेशी तकनीक के मेल से तैयार किया गया है।

फ्रांस की तकनीक और भारतीय निर्माण का संगम

अब तक वंदे भारत के रैक मुख्य रूप से चेन्नई स्थित आईसीएफ (ICF) द्वारा तैयार किए जाते थे, लेकिन इस बार बड़ा बदलाव हुआ है:

  • अल्सटॉम (Alstom) का सहयोग: भारत में पहली बार वंदे भारत के इस रैक को फ्रांस की मशहूर कंपनी 'अल्सटॉम' के तकनीकी सहयोग से बनाया गया है।

  • निर्माण: इस 16 कोच वाले आधुनिक रैक का निर्माण रेलवे कोच फैक्ट्री, कपूरथला में किया गया है। इसमें यूरोपीय देशों में उपयोग होने वाले अत्याधुनिक सेफ्टी फीचर्स और तकनीक का इस्तेमाल हुआ है।


ट्रायल की मुख्य बातें

  • रूट: परीक्षण कोटा-शामगढ़-कोटा रूट पर किया जा रहा है।

  • निगरानी: आरडीएसओ (RDSO), लखनऊ के वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी देखरेख में यह पूरी प्रक्रिया चल रही है।

  • समय: ट्रायल का निर्धारित समय सुबह 8:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक रखा गया है।

किन मानकों पर हो रही है जांच?

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन के अनुसार, परीक्षण के विभिन्न चरणों में ट्रेन के निम्नलिखित पहलुओं को परखा जा रहा है:

  1. पिकअप और स्पीड: पहले चरण में 60 से 115 किमी प्रति घंटे की गति पर ट्रेन की पिकअप क्षमता देखी गई।

  2. ब्रेकिंग सिस्टम: आपातकालीन और सामान्य परिस्थितियों में ब्रेक की प्रभावशीलता की जांच की जा रही है।

  3. हाई स्पीड ट्रायल: आने वाले दिनों में इस ट्रेनसेट को इसकी अधिकतम क्षमता यानी 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर दौड़ाकर इसकी सुरक्षा और स्थिरता का परीक्षण किया जाएगा।