सरकारी आंकड़ों में भले ही मुद्रास्फीति नियंत्रण में दिखाई दे रही हो, परंतु धरातल पर स्थितियां इसके ठीक विपरीत नजर आ रही हैं। चालू वित्तीय वर्ष में आम जनता को महंगाई की एक और भीषण मार झेलनी पड़ सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के नवीनतम अध्ययन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर औसतन 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष में मात्र 2.0 प्रतिशत के स्तर पर थी। जुलाई में खुदरा महंगाई 4.45 फीसदी दर्ज की गई थी, परंतु अब बेस इफ़ेक्ट का सुरक्षा कवच समाप्त होने से कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।

कच्चा तेल 100 डॉलर के पार, पेट्रोलियम कंपनियों का घाटा बढ़ा

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य व कूटनीतिक तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई हैं। चूंकि भारत अपनी जरूरत का 88 फीसदी से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए इसका सीधा असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। तेल विपणन कंपनियों को वर्तमान में पेट्रोल पर लगभग 5 रुपये प्रति लीटर, डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर और रसोई गैस (LPG) सिलेंडर पर करीब 200 रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है। यदि खुदरा दरों में बदलाव नहीं होता है तो कंपनियों के मार्जिन पर गहरा दबाव बनेगा।

माल ढुलाई लागत में 46% उछाल से गैर-खाद्य उत्पाद होंगे महंगे

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के दौरान थोक स्तर पर परिवहन व माल ढुलाई से जुड़ी लागत में करीब 46 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उत्पादक और आपूर्तिकर्ता अब तक इस बढ़ी हुई लागत को खुद वहन कर रहे थे, किंतु आने वाले महीनों में इस खर्च को सीधे अंतिम उपभोक्ताओं पर स्थानांतरित किया जाएगा। माल ढुलाई महंगी होने से गैर-खाद्य सामग्री की खुदरा कीमतों में भारी उछाल आना तय माना जा रहा है।

खाद्य टोकरी में उबाल: दाल, अनाज और प्याज की कीमतों में तेजी

सब्जियों के दामों में आई मामूली राहत के बावजूद जुलाई माह में खाद्य मुद्रास्फीति 5.3 प्रतिशत से बढ़कर 5.5 प्रतिशत पर पहुंच गई। अनाज और दालों की कीमतों में लगातार दबाव बना हुआ है, जबकि प्याज की महंगाई दर 22.6 प्रतिशत के उच्च स्तर पर जा पहुंची है। इसके अतिरिक्त घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर हाल के दिनों में हुई 89 रुपये की वृद्धि ने आम परिवारों के रसोई के बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है।