युद्ध की मार, बढ़ी लागत और घटे ऑर्डर से उद्योग संकट में
जयपुर। राजस्थान से सेरेमिक टाइल्स के लिए कच्चा माल, मार्बल, ग्रेनाइट, गारमेंट, मेहंदी और ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स बड़े पैमाने पर विदेशों में निर्यात किए जाते हैं लेकिन मौजूदा हालात में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पोर्ट और एयरपोर्ट पर संचालन प्रभावित होने से माल ढुलाई में गंभीर बाधाएं आ रही हैं। फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल के अनुसार जहां पहले कंटेनर का किराया करीब 1000 डॉलर था, वह अब बढ़कर 8000 डॉलर तक पहुंच गया है। इस भारी बढ़ोतरी के चलते निर्यातकों के लिए माल भेजना महंगा और घाटे का सौदा बन गया है। ईद के मौके पर खाड़ी देशों में भेजी जाने वाली राजस्थान की मेहंदी के कई ऑर्डर भी रद्द हो गए हैं, जिससे व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा है। इस स्थिति का असर रोजगार पर भी पड़ रहा है। गैस आपूर्ति प्रभावित होने से सेरेमिक और ग्लास उद्योग की कई इकाइयां प्रभावित हो रही हैं और कुछ बंद होने की कगार पर हैं। माइनिंग गतिविधियों पर भी इसका असर देखा जा रहा है, जिससे उत्पादन प्रभावित हो रहा है। वहीं खाड़ी देशों में काम कर रहे राजस्थान के लाखों प्रवासी कामगारों पर भी इसका असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राजेंद्र राठौड़ ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह इस गंभीर विषय पर चुप है, जबकि राज्य सरकार ने प्रभावित लोगों के लिए हेल्पलाइन जारी की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन पर टैक्स में कमी जैसे कदम कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह वैश्विक तनाव लंबा खिंचता है, तो इसका असर राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के निर्यात और उद्योग पर दीर्घकालिक रूप से पड़ सकता है।

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