Friday, 15 December 2017, 9:38 PM

नयी शती में चित्रकला का भविष्य

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Chinmay shesh Mehta, Jaipur says on February 9, 2017, 7:36 AM

परम प्रिय भाई श्री अशोक भौमिक का आलेख ‘नयी शती में चित्रकला का भविष्य’ बड़े ही मनोयोग से पढ़ा । इसे मूमल में पुनः प्रकाशित करने हेतु हार्दिक साधुवाद । मेरा सभी सृजनकारों तथा सृजनप्रेमियों से विनम्र आग्रह है कि वे न केवल इसे ध्यान से पढ़े बल्कि आलेख में उठाये गए मुद्दो पर अपनी राय व्यक्त कर इस संवाद को आगे बढ़ाएं । भाई श्री अशोक भौमिक विशेष रूप से बधाई के पात्र हैं क्योंकि उन्होंने कला जगत में लंबे समय से व्याप्त छद्म भरी मौनता को बहुत ही बेबाक होकर तोड़ा है । आधुनिक कला के विकास की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि सर्जन कर्म के साथ साथ वैचारिक संवाद भी आगे बढ़ता था जो समाज को लगातार नए नए इडियम्स से जोड़े रखता था । पिछली कुछ शतियों से कलाकृतियों सिर्फ बाज़ार की मांग के आधार निर्माण हो रहा हैं कला के महत्वपूर्ण मुद्दो पर न ही गंभीर विचार विमर्श हो रहा है न हीं लेखन । इसीलिए श्री अशोक भौमिक के इस लेख को मैं एक ऐतिहासिक शुभारम्भ के रूप में देखता हूँ । इस लेख में उठाये गए कई मुद्दों पर अपनी विस्तृत टिप्पणी शीघ्र प्रेषित करूँगा । पुनः धन्यवाद चिन्मय मेहता



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